श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर ईरानी झंडे के फहराने से कश्मीर में तनाव चरम पर पहुंच गया। सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने हिंसक आंदोलनों को 1990 के कट्टरपंथी दौर से जोड़ा और तुरंत कार्रवाई की मांग की।
पंडित के अनुसार, ‘क्या चाहिए आजादी!’ से लेकर ‘हिज्बुल्लाह’ तक के नारे उसी मानसिकता को जाहिर करते हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बड़े स्तर पर उग्रता फैली है, लेकिन राजनीतिक दलों की खामोशी हैरान करने वाली है।
लाल चौक की यह घटना विदेशी साजिश का संकेत देती है। पंडित ने कहा, ‘ये लोग भारत को तोड़ना चाहते हैं। सबको एकजुट होकर इनका मुकाबला करना चाहिए।’ 90 के दशक की त्रासदी झेल चुके पंडित ने देशव्यापी सतर्कता बरतने का आह्वान किया।
उनकी यह पुकार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। सरकार यदि चुप रही तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। कश्मीर में शांति के लिए मजबूत इरादे जरूरी हैं।