रायसीना डायलॉग 2026 के समापन पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की हिंद महासागर कूटनीति की ताकत बयान की। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सभी राष्ट्रों को एक मंच पर एकत्र करने में सक्षम है, क्योंकि वैश्विक साझेदार इसे सबसे विश्वसनीय मानते हैं।
जयशंकर ने उल्लेख किया कि गुरुग्राम फ्यूजन सेंटर में विभिन्न देशों के विशेषज्ञ साझा कार्य कर रहे हैं। आईओआर, कोलंबो सम्मेलन, बिम्सटेक जैसे प्रयास हिंद महासागर की मजबूत नींव हैं, जिसमें प्रशांत भागीदार भी शामिल हो रहे हैं।
सेशेल्स, मॉरीशस, श्रीलंका के साथ नौसैनिक सहयोग गहरा है—भारतीय जहाज, प्रशिक्षण और अभ्यास इसका आधार हैं। ऑस्ट्रेलिया बड़े युद्धाभ्यासों में महत्वपूर्ण साथी है। भारत समुद्री लुटेरा, नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली शिकार, आपदाओं और तेल रिसाव से जूझता है। मॉरीशस व श्रीलंका की घटनाओं में भारतीय सहायता सराहनीय रही।
‘हम नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर हैं,’ जयशंकर का यह बयान भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रमाणित करता है। यह सहयोगी दृष्टिकोण क्षेत्रीय शांति को मजबूत करेगा।