इजरायल-ईरान टकराव और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों ने खाड़ी को युद्धक्षेत्र बना दिया है, जो वैश्विक अर्थतंत्र को हिला सकता है। एसबीआई रिसर्च की शनिवार जारी रिपोर्ट चेताती है- लंबा युद्ध मंदी, महंगाई और बाजार अस्थिरता ला सकता है।
भारतीय बाजार आरबीआई की बदौलत मजबूत हैं। जी-सेक यील्ड और रुपये को संभाला गया है।
लंबे संघर्ष से मैक्रो इंडिकेटर्स पर दबाव बनेगा। स्पॉट हस्तक्षेप से रुपया 92 से नीचे रहा।
होर्मुज से 20% तेल का रास्ता बंद होने का डर; ब्रेंट 91.84, डब्ल्यूटीआई 89.62 डॉलर। 10 डॉलर तेजी से सीएडी में 36 बीपीएस इजाफा, 130 डॉलर पर जीडीपी 6% तक गिरावट।
कोंड्राटिएफ चक्र के अंत में यह युद्ध संरचनात्मक बदलाव लाएगा। अमेरिका लाभान्वित, यूरोप के रूसी ऊर्जा से मुक्ति से उसके लिए फायदे। बाकी दुनिया पर दबाव।
सोने के भंडार बढ़ रहे; भारत में 17.6%। रेमिटेंस, तेल, व्यापार प्रभावित, रूस से तेल ने बचाव किया।
भारतीय संस्थाएं जोखिम वाली हैं। अनिश्चितता तेल कीमतें, महंगाई अपेक्षाएं और विश्वास हिलाएगी। सतर्कता बरतें।