बॉलीवुड की पर्यावरणविद् दीया मिर्जा ने मुंबई के घटते हरे इलाकों पर तीखा प्रहार किया। शनिवार को सोशल मीडिया पर हरे-भरे जंगल की तस्वीरें पोस्ट कर उन्होंने लिखा, ‘और हरियाली लाएं। पेड़ शहीद नहीं बनने चाहिए।’ उनका दर्द शहर की पर्यावरणीय तबाही को उजागर करता है।
मुंबई के अरेरी के मैंग्रोव, पहाड़, नदियां और प्राचीन वन क्षेत्र शहर की जीवनरेखा हैं। ये बाढ़ रोकते हैं, जलवायु नियंत्रित करते हैं, विविधता बचाते हैं और सांस लेने लायक हवा देते हैं। दीया ने चेतावनी दी कि इनकी कटाई को नए पौधों से पूरा नहीं किया जा सकता।
बेटे के उदाहरण से उन्होंने भावुक अपील की, ‘पेड़ काटकर हम बच्चों के भविष्य को मिटा रहे हैं। इसे विकास कहना पागलपन है। अगर प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाकर विकास करना है, तो ये किसका भला करेगा?’ कुछेक की भलाई सबके नुकसान पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
नगर निगम को संबोधित करते हुए कहा, ‘मुंबईवासी आपके साथ हैं। विकास और प्रकृति संरक्षण का संतुलन बनाएंगे।’ पूर्व यूएन पर्यावरण दूत के नाते उनकी बात में वजन है।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। दीया का आह्वान शहर को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि सतत विकास ही एकमात्र रास्ता है।