राजनीति के मैदान में तूफान: बिहार सीएम नीतीश कुमार की राज्यसभा सदस्यता की कोशिश पर विपक्ष ने हमला बोला है। कांग्रेस के उदित राज ने इसे जनता के प्रति घोर विश्वासघात करार दिया, जबकि सपा ने भाजपा की साजिश का पर्दाफाश किया।
उदित राज ने कहा, नीतीश ईबीसी के सहारे नेता बने, लेकिन दो दशकों में उनके हक में कुछ नहीं। यूनिवर्सिटी-कॉलेजों का टोटा, स्पेशल कोटा अधूरा, बस दिखावटी ड्राइव। मुख्यमंत्री रहते राज्यसभा का क्या औचित्य? वहां जाने के बाद भुला दिए जाएंगे। ईबीसी संग यह धोखा है।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने चेताया कि भाजपा बैकडोर से बिहार हथियाना चाहती है। नीतीश नाम की सरकार अब भाजपा मुखिया चाहती है। भाजपा राज्यों में विकास पीछे, सांप्रदायिकता आगे।
एक्स पर नीतीश ने अपनी मंशा स्पष्ट की। संसदीय सफर की शुरुआत से ही बिहार के साथ संसद दोनों सदनों में सदस्य बनने की तमन्ना। इस चुनाव से वह पूरी होगी।
नेपाल 2026 चुनाव पर राज बोले, भारत के पड़ोसियों को लोकतंत्र बचाना होगा। वहां संवाद संभव, तानाशाही में नहीं। सभी पार्टियों को मैदान मिले। नेपाल लोकतंत्र मजबूत करे।
यह घटनाक्रम बिहार गठबंधन को हिला रहा है। पिछड़े वर्गों की उपेक्षा और सांप्रदायिक जोखिम के बीच नीतीश का कदम आगामी चुनावों की तस्वीर बदल सकता है।