तपती गर्मी में तिल के तेल का अभ्यंग उचित है या नहीं? सर्द ऋतु में यह शरीर की रक्षा करता है, लेकिन गर्मियों में क्या यही नियम लागू होता है?
आयुर्वेदिक अभ्यंग है गुनगुने तेल से नियमित हल्की मालिश। तिल तेल को श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि यह गहराई से पोषण देता है, वात दोष शांत करता है। फिर भी ग्रीष्म में पित्त वृद्धि के कारण गर्म तासीर वाली वस्तुओं से परहेज की सलाह है।
समाधान है संयम। हफ्ते में 2-3 बार, तेल हल्का गर्म कर सुबह उपवास में मालिश करें। फायदे: बेहतर रक्त प्रवाह, जोड़ों की सुरक्षा, वात नियंत्रण, त्वचा पोषण, तनाव मुक्ति, उत्तम निद्रा।
यह पद्धति शरीर और मन को संतुलित रखती है। मौसमी बदलाव के साथ इसे जारी रखें।
हालांकि सावधान रहें: बुखार, इंफेक्शन, त्वचा विकृति, पित्ताग्नि या अपच में टालें। आयुर्वेद विशेषज्ञ की मार्गदर्शन से लाभ लें।