इंस्टाग्राम पर शेफ विकास खन्ना ने यादें ताजा कीं – 2011 होली पर वृंदावन में विधवाओं का सफेद चेहरा रंगों की दुनिया में उदास। यही नजारा उनकी फिल्म ‘द लास्ट कलर’ का बीज बना। त्योहार की रौनक में विधवाओं की उपेक्षा ने उन्हें झकझोर दिया।
उस दिन उन्होंने कहानी लिखी, जो किताब बनी, फिर फिल्म। कान्स फेस्टिवल से शुरूआत, दुनिया भर के 100 फेस्टिवल्स तक पहुंच। यूएन में खड़े होकर वाहवाही, अमेरिकी कैपिटल में विधवाओं के अधिकारों की बात। ग्लोबल विडोज एंबेसडर।
ऑस्कर के लिए चुनी गई, अमेजन प्राइम पर उपलब्ध। खन्ना कहते हैं, तारीफ से बड़ी सीख मिली – उत्सव सबका हो। ‘रंग, खुशी जोड़ना सबसे बड़ा काम।’ इसी सोच से ‘बंगलो’ मिशन, जहां कोई जश्न तब तक नया जब तक सभी शामिल न हों।
दुबई से वृंदावन को सलाम, जहां विधवाएं अब होली के रंगों में नहाईं।