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    Home»Tech»जंगली सिक्किम केला: नागालैंड शोध से खुलेगी टिकाऊ कृषि की नई राहें
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    जंगली सिक्किम केला: नागालैंड शोध से खुलेगी टिकाऊ कृषि की नई राहें

    Indian SamacharBy Indian SamacharMarch 3, 20262 Mins Read
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    नागालैंड
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    नागालैंड विश्वविद्यालय के शोध ने पूर्वी हिमालय की जंगली केला प्रजाति मूसा सिक्कीमेंसिस को जलवायु लचीली खेती का भविष्य बताया है। आनुवंशिक अध्ययन से पता चला कि यह प्रजाति रोगों, सूखा और पर्यावरणीय चुनौतियों से लड़ने में माहिर है, जो टिकाऊ कृषि के लिए वरदान साबित हो सकती है।

    सिक्किम या दार्जिलिंग केला कहलाने वाली यह प्रजाति आनुवंशिक भंडार के रूप में उभरी है, जो केले की नस्ल सुधार में सहायक होगी। नागालैंड जैव विविधता का केंद्र होने के बावजूद वनों की हो रही कटाई से जंगली किस्में खतरे में हैं।

    अंतरराष्ट्रीय जर्नल में छपी इस रिपोर्ट ने संरक्षण की पुकार लगाई है। डॉ. अनिमेष सरकार, KR सिंह और डॉ. एस वॉलिंग की टीम ने कठिन भूभाग पार कर स्थानीय जर्मप्लाज्म की मजबूती का मूल्यांकन किया।

    विश्वविद्यालय ने ‘केला जैव विविधता गलियारा’ बनाकर जीवंत जीन बैंक तैयार किया, जो अनुसंधान, प्रजनन और प्रशिक्षण को सपोर्ट करता है। कुलपति प्रो. जगदीश के. पटनायक ने इसे पूर्वोत्तर की वनस्पति रक्षा की मिसाल बताया।

    किसानों में जंगली बीजों के प्रति जागरूकता की कमी और संकरों का क्रेज चुनौती है, मगर संभावनाएं रोमांचक हैं—रोगमुक्त फसलें, रेशे से बने उत्पाद और स्वास्थ्यवर्धक ड्रिंक्स। आदिवासी परंपराओं में ये केले भोजन से लेकर दवा तक काम आते हैं।

    मधुमेह, संक्रमण जैसी समस्याओं का इलाज करने वाले गुणों के साथ यह शोध राज्य की केले जैव विविधता मानचित्रण परियोजनाओं का हिस्सा है। जलवायु संकट के दौर में यह कदम पोषण और उत्पादन की गारंटी देगा।

    Banana Biodiversity Climate Resilient Crops Genetic Diversity Musa sikimensis Nagaland University Northeast India Research Sustainable Agriculture Wild Banana
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