ईरान संकट के साये में भारत निश्चिंत है। अधिकारियों ने खुलासा किया कि कच्चा तेल, पेट्रोलियम, एलपीजी व एलएनजी का 25 दिनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिसमें रास्ते में आई खेपें भी हैं। यह स्थिति देश को तात्कालिक झटकों से बचाएगी।
85 प्रतिशत आयात पर निर्भर भारत के लिए होर्मुज जलडमरू एक बड़ा जोखिम था, जहां से 50 प्रतिशत तेल आता था। युद्ध ने प्रवाह बाधित किया, लेकिन स्मार्ट कदमों ने संतुलन बनाया।
रूस, अफ्रीका, अमेरिका से बढ़ते आयात ने निर्भरता घटी। आईएसपीआरएल के भंडार—पुदुर (2.25 एमएमटी), विशाखा (1.33), मंगलुरु (1.5)—तैयार। चांदीखोल विस्तार जारी। कंपनियों के स्टॉक हफ्तों चलेंगे।
सरकार ने उत्पाद निर्यात रोका है। ब्रेंट 80 डॉलर से ऊपर, 10 प्रतिशत वृद्धि। वित्त वर्ष 2024-25 में 137 अरब डॉलर खर्च, अब तक 100.4 अरब। महंगाई का खतरा है, लेकिन विविधीकरण और भंडार सुरक्षा देंगे।
भारत की दूरदर्शिता अब फल दे रही है। वैश्विक अस्थिरता में भी घरेलू बाजार स्थिर रहेगा।