महिलाओं के लिए स्वास्थ्य चुनौतियां आम हैं—बालों का झड़ना, त्वचा पर कील-मुंहासे और मासिक धर्म का अनियमित होना। इनके पीछे तनाव या उम्र को दोष देने के बजाय विशेषज्ञ जिंक की कमी की ओर इशारा करते हैं।
ट्रेस मिनरल जिंक शरीर की कोशिकाओं को ठीक करता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है, हार्मोन बैलेंस करता है और जीन बनाता है। आयुर्वेद इसे ऊतकों का बलदाता और पाचन को संतुलित करने वाला कहता है। रोज 8-12 एमजी की जरूरत प्रजनन, भरपाई और संतुलन के लिए पड़ती है।
कमी से हार्मोन बिगड़ते हैं, पीरियड्स देरी से आते हैं, दर्द असहनीय होता है, ब्लीडिंग ज्यादा या पीएमएस जैसे मूड स्विंग्स व ब्लोटिंग बढ़ जाते हैं। थायरॉयड प्रभावित होकर थकान लाता है।
बाल कमजोर पड़ते हैं क्योंकि जिंक रोम छिद्रों को पोषण देता है। त्वचा सूजाव कम करने में भी भूमिका निभाता है। कद्दू के बीज, चने, मांसाहार या सप्लीमेंट्स से भरपाई करें। जांच करवाएं और स्वस्थ जीवन जिएं।