पश्चिमी एशिया के तनावपूर्ण हालात और होर्मुज जलमार्ग से तेल सप्लाई पर खतरे के बीच कच्चे तेल के दाम मंगलवार को करीब 1 प्रतिशत की हल्की बढ़त पर टिक गए। पिछली सत्र में 10 प्रतिशत से अधिक के धमाकेदार उछाल के बाद अमेरिकी तेल 72.23 डॉलर/बैरल और ब्रेंट 79.2 डॉलर पर पहुंचा।
ईरान के सऊदी तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रहार और स्ट्रेट में नौवहन चेतावनियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को दहला दिया। यह मार्ग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल ले जाता है, भारत को 40 प्रतिशत से ज्यादा इसी से मिलता है। महंगाई का डर भी गहरा गया।
अमेरिका ने कीमतों को नियंत्रित करने के कदमों का ऐलान कर घबराहट कम की। स्टेट सेक्रेटरी रूबियो ने बताया कि ऊर्जा और ट्रेजरी विभाग योजना पेश करेंगे।
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि लंबे बाधा पर ब्रेंट 120 डॉलर छू सकता है। छोटे संघर्ष में 5-10 डॉलर, ढांचागत क्षति पर 10-12 डॉलर की संभावना। भारत का तेल बिल हर डॉलर वृद्धि पर 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है।
रिजर्व से कुछ समय संभाला जा सकता है, लेकिन विविधीकरण जरूरी। रूस, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका दिशा में प्रयास तेज। तेल कीमतें अब भी जोखिम भरी बनी हुई हैं।