मुंगेर के मुकेश और रंजीत ने रेलवे भर्ती में धांधली का ऐसा जाल बिछाया कि डेढ़ साल तक कोई भनक न लगी। 2024 की भर्ती में मुकेश ने आत्मविश्वास की कमी से रंजीत को 6 लाख में परीक्षा दिलवाई। गूगल-एडिटिंग से बनी हाइब्रिड फोटो ने कमाल कर दिया—दोनों चेहरों का मिश्रण।
पटना में सीबीटी, भोपाल में मेडिकल क्लियर। मुकेश ने जुलाई 2025 से रेल मंडलों में काम किया, ट्रेनिंग भी ली। लेकिन एक साल में बायोमेट्रिक जांच ने खेल बिगाड़ा। 14 नवंबर को स्कैन फेल, रंजीत का डेटा सामने आया।
मुकेश बिहार भागा, पर सीबीआई की टीम ने मुंगेर में छापा मार गिरफ्तार किया। रंजीत भी पकड़ा गया। कोचिंग संचालक के पुराने मामलों की जांच तेज।
ये केस आधार की ताकत दिखाता है। पता-फोटो अपडेट सरल (100 रुपये), मगर हर वेरिफिकेशन में बायोमेट्रिक मिलान अनिवार्य। सरकारी नौकरियों में अब फर्जीवाड़ा मुश्किल।