भागलपुर जेल के द्वार पर मां-बेटे का अंतिम संयोग एक मार्मिक मोड़ ले आया। एनडीपीएस एक्ट के तहत बंद सगे भाई पुरुषोत्तम और रवि की मां की मृत्यु की सूचना मिली तो परिवार स्तब्ध रह गया। मां अपने लाड़लों को अंतिम दर्शन देना चाहती थीं, किंतु जेल नियमों की दीवार ऊंची थी।
परिजनों ने तत्काल जेल अधिकारियों से संपर्क साधा। कोर्ट की औपचारिकताओं का जिक्र कर रात भर ठहरने को कहा। संस्कार का समय समाप्त होने को था, अतएव अर्थी जेल पहुंचाई गई। द्वार पर हाहाकार मच गया—प्रार्थनाएं, नारे, सब कुछ। पुष्पा देवी ने कहा, प्रातःकाल से अनुरोध कर रहे थे, फिर भी अस्वीकृति।
स्थिति भांप जेल अधीक्षक प्रकाश सिंह ने संवेदनशीलता बरती। अनुमति मिली और अर्थी अंदर ले जाई गई। भाइयों ने करुण क्रंदन के साथ मां को अलविदा कहा। पिता जी ने अभिव्यक्ति दी, जेलर के प्रति कृतज्ञता।
दर्शकों की आहें निकलीं, आंसू बहे। यह बबरगंज की घटना जेल व्यवस्था में मानवीय पक्ष जोड़ने का संदेश देती है। मातृप्रेम की यह कहानी हर दिल को छू गई, सुधार की पुकार बनकर गूंज रही है।