केरल की सियासी हलचल तेज हो गई है क्योंकि विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने वाला है। सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में सीपीआई ने आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से छह अनुभवी विधायकों को टिकट देने से इनकार कर दिया है। ये सभी तीन-तीन कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।
सोमवार की शीर्ष समिति बैठक में यह फैसला हुआ। जिनका टिकट कटा है उनमें चित्तयम गोपकुमार, ई. चंद्रशेखरन जैसे प्रमुख नाम हैं, साथ ही पीएस सुपाल, ईके विजयन, वी. शशि और ईएस जयलाल। सीपीआई की 2021 की 17 सीटों वाली सफलता को दोहराने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।
गठबंधन में सीटों का बंटवारा अंतिम चरण में है। केरल कांग्रेस (एम) ने पूर्व की 12 के मुकाबले एक अतिरिक्त सीट का दावा ठोका है। जोस के. मणि की इस मांग से हलचल मच गई है।
सीपीआई-एम पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जो मंगलवार को सचिवालय में अपने उम्मीदवारों की अंतिम सूची पर मुहर लगाएगी। जिला स्तर से भेजी गई रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार इस सूची से थॉमस इसाक, एमएम मणि, पी. जयराजन, एम. स्वराज और ए. विजयराघवन जैसे दिग्गज बाहर हो सकते हैं।
एमएम मणि ने स्वास्थ्य कारणों को खारिज करते हुए कहा कि डायबिटीज उनकी एकमात्र समस्या है, जो पार्टी में आम है। उनके क्षेत्र में केके जयचंद्रन को जिला ने हरी झंडी दिखाई है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा के टिकट पर सस्पेंस कायम है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन सनी जोसेफ से भिड़ने को बेताब हैं। पोलित ब्यूरो ने विजयन को अभियान का कमान सौंपी है। आगामी बैठक गठबंधन की एकजुटता और ताजगी का पैमाना बनेगी।