फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। पेरिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी सैन्य कार्रवाइयों का फैसला सुरक्षा परिषद जैसे मंचों पर होना चाहिए था।
उनके अनुसार, यूएन में चर्चा से कार्रवाई को कानूनी बल मिलता। उन्होंने राहत की सांस लेते हुए कहा कि फ्रांस के किसी नागरिक को हानि नहीं हुई। दूसरी ओर, जर्मनी के अमेरिका-इजरायल के साथ जुड़ने के संकेत मिल रहे हैं।
इजरायल के आर्मी रेडियो के हवाले से द टाइम्स ऑफ इजरायल ने खबर दी कि जर्मन अधिकारी ईरान के खिलाफ अभियान में भागीदारी पर गंभीरता से सोच रहे हैं, बशर्ते ईरान पड़ोसी देशों पर हमले रोके नहीं। जर्मन विदेश मंत्रालय और संसदीय समिति ने अमेरिका संग संयुक्त योजना की पुष्टि की।
फ्रांस-जर्मनी-यूके ने संयुक्त बयान में ईरान की आक्रामकता की भर्त्सना की और रक्षात्मक कदमों की धमकी दी। यूके के पीएम कीर स्टार्मर ने वीडियो संदेश में अमेरिकी सेना को ब्रिटिश बेस उपलब्ध कराने की मंजूरी दी। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटिश विमान समन्वित अभियानों में ईरानी मिसाइलें सफलतापूर्वक रोक चुके हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित रहेगा।
पश्चिमी गठबंधन मजबूत हो रहा है लेकिन फ्रांस की मांग वैश्विक मंचों पर बहस की बहस को नई दिशा दे सकती है, जो संघर्ष को टालने का संकेत है।