सुरों के जादूगर शंकर महादेवन ने ‘मितवा’ और ‘मां’ जैसे गीतों से दिल जीता। लेकिन उनका पहला हिट ‘ब्रेथलेस’ एक ऐसी चुनौती थी, जिसने उनके करियर को नई ऊंचाइयां दीं। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले शंकर का जन्म कर्नाटक परिवार में हुआ।
छोटी उम्र से ही शास्त्रीय संगीत सीखते हुए वे कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के हीरो बन गए। पुरस्कारों की झड़ी लग गई। जावेद अख्तर के साथ ‘ब्रेथलेस’ एल्बम ने सबको चौंकाया—कोई ठहराव नहीं, सिर्फ लगातार प्रवाह।
चार पन्नों की स्क्रिप्ट देखकर शंकर के होश उड़ गए। ‘यह क्या लिखा है? पत्रिका जैसा लग रहा,’ उन्होंने बताया। धुन बन चुकी थी। जावेद साहब का जवाब सरल—यह ब्रेथलेस है। बिना सांस लिए रिकॉर्डिंग ने कमाल कर दिया।
गाना सुपरहिट बना, अवॉर्ड्स आए और फिल्म ऑफरों की बौछार हुई। ‘दस’ फिल्म से डेब्यू, फिर शंकर-एहसान-लॉय का जादू। इस तिकड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया। बैंड स्टाइल में वे आज भी सक्रिय हैं।
शंकर की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है। पहले गाने की घबराहट से आज की ऊंचाइयों तक, यह प्रेरणा का स्रोत है।