अमेरिकी संसद में ट्रंप प्रशासन के ईरान विरोधी सैन्य अभियान को भारी तालियां मिल रही हैं। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को रिपब्लिकन दिग्गजों ने ईरान की न्यूक्लियर साजिश, मिसाइल उन्माद व आतंकी नेटवर्क के खिलाफ जरूरी चोट ठहराया।
सीनेट मेजॉरिटी लीडर जॉन थ्यून ने चेताया कि ईरान का न्यूक्लियर दबदबा, बैलिस्टिक मिसाइल संग्रह व क्षेत्र में आतंकी मदद अमेरिकी सैनिकों, स्थानीय लोगों व मित्र देशों के लिए असह्य खतरा है।
जॉन बैरासो ने इसे प्रतिरोध की वापसी कहा। “ईरान के आतंक शासन को नेस्तनाबूद करने वाले ट्रंप के कदम की तारीफ। यही शक्ति के जरिए शांति है।”
टॉम कॉटन ने तेहरान की दुश्मनी की फेहरिस्त पेश की: न्यूक्लियर हथियार योजना, हزارों मिसाइलें, सरकारी आतंक, 47 सालों का संघर्ष—होस्टेज, बेरूत, खोबर, इराक-अफगान बमबारी से हजारों अमेरिकी हताहत, ट्रंप पर हमले।
रोजर विकर ने उद्देश्य स्पष्ट किए—परमाणु हथियारों की भूख हमेशा दबाना, मिसाइल विनिर्माण क्षमता तोड़ना, नौसैनिक व प्रॉक्सी ताकत उखाड़ना। स्पीकर जॉनसन ने बताया कि कांग्रेस प्रमुखों को सैन्य जरूरत पर पहले ब्रिफिंग हुई।
स्टीव स्कैलिस ने ट्रंप की शांति प्रयासों व ईरान की जिद का जायजा लिया। लिंडसे ग्राहम ने टीवी पर उत्साहित हो कहा, “आतंकवाद का मूल डूबा। सरदार खत्म। बेहतरीन प्रेसिडेंट ट्रंप।”
सांसदों ने न्यूक्लियर उल्लंघन, मिसाइल विकास व गुटों को हथियारबंदी को औचित्य बताया, इसे पहले हो जाना चाहिए था। रणनीतिक सफलता का भरोसा जताया। राष्ट्रपति की कमान संवैधानिक है, बड़े ऑपरेशन पर बहस की परंपरा। अधिक अपडेट आने वाले।
इस्लामिक रेवोल्यूशन के बाद ईरान प्रतिबंध, छाया जंग व संवर्धन तनावों से अमेरिकी नीति का अभिन्न अंग। दोनों पार्टियां न्यूक्लियर रोकथाम पर एकजुट, तरीकों में भिन्न।