खामेनेई के निधन से ईरान की सत्ता व्यवस्था में भूचाल आ गया है। अमेरिकी नेताओं के बयान और तेहरान की प्रतिक्रियाएं बता रही हैं कि देश अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
सीनेट इंटेलिजेंस प्रमुख टॉम कॉटन ने चैनलों पर कहा कि मिसाइलों पर अमेरिकी हमले जारी रहेंगे। उन्होंने विस्तार से बताया कि हवाई और समुद्री कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता को नेस्तनाबूद किया जाएगा।
कॉटन ने जमीनी फौज भेजने से इनकार किया, लेकिन क्षेत्र में अमेरिकी हितों पर खतरे की आशंका जताई।
मार्क वार्नर ने माना कि ईरान के आंतरिक हालात पर अमेरिका के पास स्पष्ट तस्वीर नहीं है।
एडम शिफ ने शासन बदलने के बहाने बड़े हमलों की निंदा की। वह शासन के खात्मे से खुश हैं, लेकिन सैनिकों को ईरानी विद्रोह में उलझाने के खिलाफ हैं।
अराघची ने कहा कि अमेरिका का कदम आक्रमण है, हमारा जवाब बचाव। ‘हर कीमत पर रक्षा करेंगे।’
दोनों पक्षों के उलटे बयान ईरान के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सत्ता की होड़ तेज हो गई है, जो मध्य पूर्व को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक नजरें तेहरान पर टिकी हैं।