चुटिया श्री राम मंदिर में विराट हिंदू सम्मेलन ने रांची को एकजुटता का संदेश दिया। विभिन्न वर्गों के लोग जुटे, ताकि समाज में सामंजस्य, सांस्कृतिक चेतना और देशभक्ति की लहर तेज हो।
मंदिर परिसर से कलश यात्रा निकली, माताओं-बहनों का जत्था आगे-आगे। महंतों को हनुमान गढ़ी रथ पर बिठा गाजे के साथ लाया गया, जो भव्य दृश्य पैदा किया।
वैदिक उद्घोष और प्रदीप जलाने के बाद महंत ने कहा, यह भीड़ संगठित शक्ति का प्रतीक है। वेद मंत्र से एकता का पाठ पढ़ाया।
अयोध्या से आए राजू दास महंत ने संघ के सौ साल के संघर्ष को याद किया, जो समाज को जोड़ने और संस्कृति बचाने में लगा।
मुख्य वक्ता आलोक कुमार ने महाभारत से सीख दी- असुरों की फूट से हार, देवताओं की एकता से जीत। ‘संगच्छध्वं’ मंत्र खोलकर बताया कि मन-वचन-कर्म एक हो तो कोई चुनौती न झुके।
समाज की उदारता और विविध पूजा पद्धतियों को सराहा, लेकिन आवश्यकता पर एक नाम से जुड़ने को कहा। सामाजिक भेद मिटाने का उपदेश दिया, संत रविदास, मीरा, वाल्मीकि उद्धृत कर कर्म प्रधानता पर जोर दिया।
सभी संत, महिलाएं, गायत्री परिजन, विहिप, जागरण मंच, पूजा समिति और संघ के पदाधिकारी सक्रिय। मिथिलेश्वर मिश्र, अशोक प्रधान सहित अनेक ने शिरकत की, सम्मेलन एकता के संकल्प पर समाप्त हुआ।