शनिवार को छत्तीसगढ़ के महासमुंद में नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने सुर्खियां बटोरीं। नौ महिलाओं सहित 15 माओवादियों ने हथियार त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया, जो ओडिशा सीमांत पर सक्रिय समिति से ताल्लुक रखते थे।
सौंपे गए हथियारों में तीन एके-47, दो सेल्फ लोडिंग राइफल और दो इंसास राइफल शामिल हैं। इनका कुल इनामी राशि 73 लाख रुपये थी। विकास उर्फ बाबन्ना जैसे प्रमुख सदस्यों ने पुनर्वास का रास्ता अपनाया।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने एक्स पर पोस्ट कर इसे सफलता बताया। पीएम मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में राज्य सरकार की अच्छे शासन और पुनर्वास पहल ने युवाओं को प्रेरित किया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि लगातार अभियान, ग्रामीण विकास और सहायता योजनाओं ने हिंसा का अंत किया। इन लोगों को समाज में पुनर्स्थापित करने के लिए हर संभव मदद दी जाएगी।
बीबीएम डिवीजन के कमेटी सदस्यों का समावेश इसकी अहमियत बढ़ाता है। हाल के वर्षों में सैकड़ों ने सरेंडर किया है। 2026 तक नक्सल समाप्ति का सपना साकार होता दिख रहा है, जो विकास की नई सुबह लाएगा।