देशभर में होली का रंग चढ़ने लगा है, लेकिन गोकुल की छड़ीमार होली का अलग ही मजा है। बालकृष्ण की लीला से प्रेरित यह परंपरा भक्तों को आकर्षित करती है। महिलाएं छड़ी लिए ग्वालों पर प्रहार कर रही हैं, तो पुरुष रंगों से भरे चेहरों के साथ हंसते-खेलते हैं।
‘हम एक महीने से होली का इंतजार करते हैं। यह नंदलाल की होली है, जिसमें प्यार से छड़ी चलाई जाती है,’ बोले एक उत्साही भक्त। राधा-कृष्ण की भक्ति में डूबे लोग रसलीला गीत गा रहे थे। गोकुल के मंदिरों पर भक्तों की भारी संख्या रही।
यह उत्सव ब्रज होली का खास हिस्सा है, जो श्रीकृष्ण के बचपन की याद दिलाता है। छड़ी का प्रयोग इसलिए, ताकि बाल रूप को कोई हानि न पहुंचे। भीड़ में हर उम्र के लोग शामिल हुए, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
प्रयागराज में भी किन्नर अखाड़े ने धूमधाम से होली मनाई। महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी ने पूजन कराया और कहा, ‘यह त्योहार दुख हरकर सुख लाता है। सभी घरों में लक्ष्मी का वास हो।’