अमेरिका व इजरायल के संयुक्त हमले से ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की शहादत ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर भूचाल ला दिया। खाड़ी देशों से भारत तक आक्रोश की लहर दौड़ रही है। जहां कुछ भारतीय समूह पीएम मोदी से कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, वहीं गीतकार जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर चीन को अंतिम आशा का केंद्र बनाया है।
एक्स पोस्ट में अख्तर ने कड़ा प्रहार किया- ट्रंप व इजरायल ने सीमाएं लांघ लीं। ईरान को इराक की तरह कुचलने की छूट मिली तो चीन का वैश्विक कद छोटा पड़ जाएगा। नेतन्याहू-ट्रंप जैसे तानाशाहों ने दुश्मनों को मजबूर कर दिया है कि वे आक्रामक जवाब दें।
पोस्ट ने बहस छेड़ दी। समर्थक अमेरिका-इजरायल की मनमानी रोकने की बात कर रहे हैं, भारत को खतरे की आहट सुना रहे हैं। विरोधी अख्तर पर ईरानी झुकाव का आरोप लगा रहे हैं। अख्तर का पुराना रुख याद आता है, जब उन्होंने तालिबान को असभ्य जंतु करार दिया और किसी मान्यता से इनकार किया।
देश-विदेश के हर विवाद में मुखर रहने वाले अख्तर की यह टिप्पणी वैश्विक समीकरणों को नया मोड़ दे रही है। मध्य पूर्व का यह संकट चीन के लिए परीक्षा बन सकता है। अख्तर की आवाज न केवल आलोचना है, बल्कि संतुलन की पुकार भी।