पाकिस्तान के सामने आर्थिक संकट गहरा रहा है। रिपोर्ट चेताती है कि बिना त्वरित और गहन सुधारों के 2031 तक ‘प्रबंधित गिरावट’ निश्चित है। टैक्स दायरा विस्तार, ऊर्जा अक्षमताओं का उन्मूलन और शासन की एलीट कैप्चर जैसी कमजोरियां दूर करनी होंगी।
पांच वर्षों में जीडीपी वृद्धि 2-3 प्रतिशत पर अटक सकती है, ठहराव को दर्शाते हुए। युवा देश में यह खतरनाक साबित होगा, डेमोग्राफिक लाभ के बजाय अस्थिरता लाएगा।
अगले साल महत्वपूर्ण—युवाओं का भविष्य तय करेंगे। कम नौकरियां पलायन को प्रोत्साहित करेंगी, रेमिटेंस सहारा तो देंगे पर ब्रेन ड्रेन क्षति पहुंचाएगा। आईएमएफ समर्थन अस्थायी, सतत विकास के लिए साहसिक नीतियां चाहिए।
रोजगार अनुत्पादक क्षेत्रों तक सीमित रहेगा। कर, डिजिटलीकरण, निर्यात सुधारों से 4-5 प्रतिशत वृद्धि और गरीबी में कमी संभव। राज्य की पुरानी असफलताएं—कर विस्तार न होना, प्रभावशाली वर्गों का वर्चस्व—झटकों से संकट बुलावा लाती हैं।
शिक्षा पर 1.9 प्रतिशत जीडीपी व्यय कम, 2.62 करोड़ बच्चे वंचित, पाठ्यक्रम पुराना। 64 प्रतिशत स्नातक कौशलहीन, 31 प्रतिशत युवा बेरोजगार। 2026-31 का भविष्य कर्ज, मुद्रास्फीति, गरीबी पर निर्भर। व्यापक बदलाव ही समाधान।