संयुक्त राष्ट्र में मध्य पूर्वी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध अपनी सैन्य कार्रवाइयों का जोरदार समर्थन किया। राजदूत माइक वाल्ट्ज ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी मित्र राष्ट्रों की रक्षा शर्तों के अधीन नहीं, बल्कि निश्चित है।
ईरान द्वारा मिसाइल तकनीक विकसित करने और कूटनीतिक अवसरों के बावजूद परमाणु कार्यक्रम जारी रखने को वाल्ट्ज ने खतरनाक बताया। उन्होंने वैश्विक सहमति दोहराई- ईरान को परमाणु शस्त्र प्राप्त नहीं हो सकते। अमेरिका इसी सुरक्षा के लिए सक्रिय है।
ट्रंप प्रशासन की बार-बार की गई ईमानदार कूटनीति का जिक्र करते हुए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। शांति के लिए सच्चा साथी न होने पर डिप्लोमेसी असफल साबित होती है।
परिषद में ईरान की उपस्थिति को यूएन का मजाक बताते हुए वाल्ट्ज ने उसके मानवाधिकार प्रवचनों पर कटाक्ष किया।
क्षेत्रीय साझेदारों कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर व जॉर्डन पर हमलों से अमेरिकी प्रतिक्रिया की अनिवार्यता स्पष्ट हुई। सहयोगियों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। शांति मजबूत इच्छाशक्ति से आतंकवाद का सामना करने में टिकी है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को कड़ा संदेश दिया कि कोई आक्रामक कदम ऐसी जवाबी ताकत झेलने को तैयार रहे। यह स्थिति क्षेत्रीय शांति प्रयासों को प्रभावित करेगी।