मुंबई के शेयर बाजार ने फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की शानदार रिटर्न देखी। एफपीआई ने 22,615 करोड़ रुपये झोंके, जो 17 महीनों का सर्वाधिक मासिक निवेश है। तीन महीने की बिकवाली के बाद यह उलटफेर बाजार के लिए राहत लेकर आया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अंतरिम चरण, बेहतर घरेलू वैल्यूएशन और कcompanies के तगड़े तिमाही नतीजों ने इस खरीदारी को हवा दी। निवेशकों का नया उत्साह हालिया निकासी को रोकने में कामयाब रहा।
पिछले आंकड़े डरावने हैं—जनवरी में 35,962 करोड़, दिसंबर में 22,611 करोड़ और नवंबर में 3,765 करोड़ की विदाई। साल भर में 1.66 लाख करोड़ की कुल बिकवाली हुई, मुद्रा अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार झगड़े, अमेरिकी टैरिफ चिंताओं और महंगे स्टॉक्स से प्रेरित।
सितंबर 2024 के 57,724 करोड़ के बाद फरवरी का आंकड़ा सबसे ऊंचा। ब्रोकरेज रिपोर्टों ने सस्ते रुपये को अस्थायी बताते हुए भारतीय इक्विटी के मजबूत भविष्य पर भरोसा जताया।
एफपीआई के पीछे हटने पर डीआईआई ने मोर्चा संभाला, बाजार को डगमगाने नहीं दिया। अब उनकी हिस्सेदारी एफपीआई से आगे निकल चुकी, जो उतार-चढ़ाव से बचाव का काम कर रही।
घरेलू बचतें शेयरों की ओर बह रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रवाह अगले 10 साल में और मजबूत होगा, सोने की हल्की चमक के बावजूद।
एफपीआई की यह धमाकेदार एंट्री बाजार को नई उड़ान देगी, भारत को वैश्विक निवेश का पसंदीदा ठिकाना बनाएगी।