रंगों की होली में बाजार के सिंथेटिक रंग त्वचा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सिलिका, माइका, भारी धातुओं से भरे ये रंग एलर्जी, रैशेज और जलन पैदा करते हैं। चेहरे पर सीधा असर पड़ता है, पुरानी बीमारियां बढ़ जाती हैं। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष जोखिम। आंखें, बाल, नाखून भी प्रभावित।
बचाव के लिए होली पूर्व तेल की परत चढ़ाएं, सनस्क्रीन लगाएं। खेलते समय चश्मा पहनें। उत्सव बाद कोमल सफाई और मॉइस्चराइजिंग करें। समस्या बनी रहे तो चिकित्सक से परामर्श लें।
प्राकृतिक रंग अपनाएं: नीम पत्तियों से हरा, बेसन-हल्दी से पीला, अनार छिलके से लाल-नारंगी, विष्णुकांता से नीला, प्याज के छिलके से गुलाबी। ये पौष्टिक, धुलन में आसान और पर्यावरण अनुकूल हैं। इस होली को स्वस्थ बनाएं।