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    Home»Entertainment»रवि उदयावर: हिंदी सिनेमा में बच्चों की फिल्में क्यों हो रही कम?
    Entertainment

    रवि उदयावर: हिंदी सिनेमा में बच्चों की फिल्में क्यों हो रही कम?

    Indian SamacharBy Indian SamacharMarch 1, 20262 Mins Read
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    बच्चों
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    मुंबई का फिल्म जगत तेजी से बदल रहा है, लेकिन बच्चों के लिए सामग्री की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। निर्देशक रवि उदयावर ने साफ शब्दों में कहा कि हिंदी सिनेमा ने बच्चों की फिल्में बनाने का सिलसिला लगभग रोक दिया है। वे चाहते हैं कि उद्योग ऐसी कहानियां लाए जो बच्चों की दुनिया को छुएं और उनकी मासूमियत को संजोएं।

    पहले परिवारिक मनोरंजन की फिल्में सिल्वर स्क्रीन पर छाई रहती थीं। अब एक्शन-धमाकों का बोलबाला है। उदयावर का मानना है कि बच्चों को ईमानदार भावनाओं वाली कहानियां चाहिए। उन्होंने रोमांस के संदर्भ में भी बात की कि आजकल सब कुछ अतिशयोक्तिपूर्ण हो गया है, पुरानी सादगी गुम हो चुकी है।

    जब घरेलू फिल्में न दें तो युवा विदेशी शो की ओर मुड़ जाते हैं। के-ड्रामा जैसी चीजें सरल रिश्तों की कहानियां देती हैं, जो दर्शकों को भाती हैं। उदयावर कहते हैं, ‘लोग दो लोगों के बीच पनपते प्रेम को देखना चाहते हैं, बिना अतिरिक्त ड्रामा के।’

    उनकी रणनीति है कहानी को धीमी गति देना, ताकि किरदारों से जुड़ाव हो। सिनेमा को कभी-कभी रफ्तार घटाकर ही सच्चाई लाई जा सकती है। यह नजरिया बॉलीवुड को नई दिशा दे सकता है।

    बच्चों की फिल्मों पर निवेश से न केवल बाजार बढ़ेगा, बल्कि सांस्कृतिक विरासत भी मजबूत होगी। निर्देशक की यह अपील समयोचित है, जिस पर विचार करने की जरूरत है।

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