भारतीय मुक्केबाजी की शान मैरी कॉम ने हर चुनौती को पछाड़ा। मणिपुर की इस बेटी ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाए, बल्कि लाखों लड़कियों को प्रेरित किया। छह विश्व खिताब और ओलंपिक पदक उनकी जिद का नतीजा हैं।
कांगथेई गांव में 24 नवंबर 1982 का जन्म। गरीबी भरा बचपन, खेतों का काम और परिवार की जिम्मेदारी। डिंग्को सिंग के 1998 स्वर्ण ने बॉक्सिंग का रास्ता दिखाया।
पिता की मनाही के बावजूद रिंग में कदम रखा। पैसे की तंगी, परिवार का असहयोग—कुछ न रुक सका। ओनलर से 2005 में शादी, पूर्ण सहयोग मिला। जुड़वां बच्चों के बाद 2012 ओलंपिक में शानदार वापसी और कांस्य।
एकमात्र मुक्केबाज जिन्होंने छह विश्व स्वर्ण जीते। एशियाई और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सोना। 2006 पद्मश्री, 2009 खेल रत्न। मैरी की मेहनत से साबित होता है—सपने सच होते हैं, अगर हार न मानी जाए।