शनिवार को महाराष्ट्र विधान परिषद की कार्यवाही में हंगामा मच गया। मुंबई समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों की मौजूदगी पर सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तलवारें भिड़ गईं। यह बहस न केवल स्थानीय मुद्दों को छूती है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक आयाम भी उजागर करती है।
शिवसेना (यूबीटी) विधायक अनिल परब ने बहस को तीखा मोड़ दिया। उन्होंने चुनौती दी कि दो दिनों के अंदर 2,000 घुसपैठियों का पता लगा देंगे। महापौर ऋतु तावड़े के नकली जन्म प्रमाणपत्रों वाले बयान का हवाला देकर परब ने प्रशासन पर थूक दिया। ‘झोपड़पट्टियों से लेकर छोटे उद्योगों तक इनका कब्जा है। पुलिस व निगम की आंखें बंद क्यों हैं?’ उन्होंने सवाल किया।
किरीट सोमैया पर तंज कसते हुए बोले, ‘उन्हें मेरे साथ जोड़ दो, काम हो जाएगा।’ परब ने फाइल चेकिंग से आगे बढ़कर इलाकाई जांच के लिए टास्क फोर्स की मांग उठाई।
गृह मंत्री योगेश कदम ने पलटवार किया। ठोस जानकारी साझा करने को कहा और आंकड़े रखे- एमवीए काल में 109 जबकि अब तक 2,376 अप्रवासी निर्वासित। थानों में विशेष यूनिट बनाई गई हैं, एटीएस अभियान चला रही है। टास्क फोर्स पर विचार का भरोसा दिलाया।
यह सियासी टकराव महाराष्ट्र की अवैध अप्रवासन चुनौती को सामने लाता है। मुंबई जैसे महानगरों में इनकी घुसपैठ संसाधनों पर दबाव डाल रही है। सरकारें दावे कर रही हैं लेकिन विपक्ष सवालों की बौछार कर रहा है। भविष्य में कड़े कदमों की उम्मीद है।