गुदा में दर्द, सूजन, रक्तस्राव और प्रोलैप्स—बवासीर की ये तकलीफें जीवन कष्टमय बनाती हैं। कब्ज, गलत खान-पान, बैठे रहना और मानसिक तनाव इसके कारक हैं। आयुर्वेद दोष संतुलन पर जोर देकर स्थायी समाधान देता है।
वात, पित्त, कफ संतुलित रखें। आहार में तैलीय-तीखा छोड़ें। हरी चना, ज्वार-बाजरा, हल्की सब्जियां और फल-जूस शामिल करें। पाचन मजबूत बनेगा, कब्ज भागेगा।
त्रिफला चूर्ण पेट साफ करने का रामबाण है। आमला छिलका मिलाकर रात को गर्म जल से ग्रहण करें। यह बवासीर की जड़ मिटाता है।
गुलकंद रोजाना खाएं—सूजन-पाचन दोनों नियंत्रित। लाजवंती का स्वरस खूनी बवासीर रोकेगा। ताजे पौधे से तैयार करें।
हिप बाथ आजमाएं: त्रिफला-पिप्पली-गूलर क्वाथ में विराजें। बाद तेल अनुलेपन से आराम। योग और प्राणायाम सहायक।
आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य। इन नुस्खों से स्वस्थ जीवन जिएं।