क्षितिज के किनारे चमकता विशाल चांद – यह दृश्य कवियों को प्रेरित करता रहा है। लेकिन वास्तव में चांद बड़ा नहीं होता, नासा बताता है कि यह दृष्टि भ्रम है जो सदियों से लोगों को भ्रमित कर रहा है।
वैज्ञानिक जांच से पुष्टि होती है कि चांद का कोणीय आकार कहीं भी 0.5 डिग्री का ही रहता है। आसपास के वातावरण के कारण दिमाग गलत आकार का अनुमान लगाता है। इमारतें, पहाड़ दूरी का भ्रम पैदा करते हैं, जिससे चांद विशाल लगता है।
घर पर आजमाएं: उंगली से मापें या पाइप से निहारें, सच्चाई सामने आ जाएगी। फोटोग्राफी सबसे पक्का प्रमाण – एकसमान लेंस से ली गई तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। वायु की परावर्तन से हल्का चपटा दिख सकता है, लेकिन बड़ा कभी नहीं।
नारंगी रंग का राज: चांदनी घनी हवा से गुजरती है, छोटी तरंगें छिटक जाती हैं, लंबी रंग बच जाते हैं। धूल-धुआं प्रभाव बढ़ाता है।
एमर्ट नियम और पोंजो प्रभाव जैसी थ्योरियां हैं, पर पूरी तरह सहमत कोई नहीं। अंतरिक्ष में भी यही भ्रम होता है, जो दिमागी संरचना की ओर इशारा करता है। यह रहस्य आकाश प्रेमियों को हमेशा आकर्षित करेगा। प्रयोग करें और जानें।