हावर्ड यूनिवर्सिटी का साउथ एशियन विभाग एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण मुश्किल में फंस गया, जिसने संस्कृत कार्यक्रम की छवि खराब की। हिंदू संगठनों की नाराजगी के बाद विभाग ने माफी मांग ली और विस्तृत बयान जारी किया।
बयान में संस्कृत के अध्ययन की गौरवपूर्ण परंपरा का जिक्र किया गया। यह भाषा दक्षिण एशियाई साहित्य और भाषाओं की नींव है। विभाग ने आश्वासन दिया कि आगे की सभी पोस्ट गरिमापूर्ण होंगी।
विश्वविद्यालय ने विवाद से खुद को अलग बताया। लक्ष्मी मित्तल और उनके परिवार का इससे कोई लेना-देना नहीं, ऐसा स्पष्ट किया गया। मित्तल इंस्टीट्यूट ने भी सहमति जताई।
रामायण-महाभारत जैसे ग्रंथों में संस्कृत की चमक है, इसे देववाणी कहा जाता है। हावर्ड में इसके बहुस्तरीय कोर्स उपलब्ध हैं। नॉर्थ अमेरिकी हिंदू समूहों ने माफी का समर्थन किया।
संस्कृत ने आधुनिक भाषाओं को समृद्ध किया है। धार्मिक और बौद्धिक वर्गों में इसकी महत्ता बेमिसाल है। यूएस-कनाडा के आयोजनों में इसके जानकारों ने सराहना बटोरी। यह प्रकरण अकादमिक जगत के लिए सबक है।