रक्षा उत्पादन इकाई से जुड़े एक अधिकारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई ने ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री, हजरतपुर (फिरोजाबाद) के तत्कालीन सीजीएम के खिलाफ डिसप्रोपोर्शनेट एसेट्स का मामला ठोक दिया। 1998 बैच के आईओएफएस अधिकारी की कानपुर पोस्टिंग पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन जांच का डर जरूर है।
26 फरवरी को दर्ज एफआईआर के मुताबिक, अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 तक 55.58 लाख रुपये (73.28%) की अतिरिक्त संपत्ति का खुलासा हुआ। कोर्ट के आदेश पर 27 फरवरी को आगरा, लखनऊ, बरेली, कानपुर के पांच ठिकानों पर सीबीआई की टीमें भारी पड़ीं।
परिणाम चौंकाने वाले: आगरा फ्लैट (2025), लखनऊ फ्लैट (2023), बरेली प्रॉपर्टी के दस्तावेज। साथ ही 49 लाख के आभूषण, 5 लाख कैश, बैंक खाते, कार्ड और खर्चों के प्रमाण-पत्र जब्त। ये निष्कर्ष बताते हैं कि अवैध कमाई का जाल कितना जटिल था।
एजेंसी अब गहन जांच कर रही है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े संस्थानों में साफ-सुथरी छवि बनाए रखना जरूरी। यह केस अन्य अधिकारियों के लिए चेतावनी है।