देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: केंद्र सरकार ने चावल को पोषक तत्वों से युक्त करने की प्रक्रिया को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना सहित अन्य योजनाओं में रोक दिया है। इसका कारण है भंडारण के दौरान पोषक गुणों की हानि।
खाद्य मंत्रालय द्वारा आईआईटी खड़गपुर को सौंपी गई स्टडी ने खुलासा किया कि विविध जलवायु में नमी, गर्मी व रखरखाव की कमियों से एफआरके व एफआर की गुणवत्ता घटती है। लंबे भंडारण से सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे लाभार्थियों को अपेक्षित फायदा नहीं मिलता।
केंद्रीय पूल में 674 लाख मीट्रिक टन चावल मौजूद है जबकि सालाना वितरण 372 लाख टन का है। इस विशाल मात्रा को देखते हुए प्रभावी विकल्प ढूंढना जरूरी था। सरकार ने बेहतर वितरण प्रणाली विकसित होने तक प्रक्रिया स्थगित करने का फैसला किया।
पीडीएस, एकीकृत बाल विकास योजना व स्कूल मध्याह्न भोजन पर कोई प्रभाव नहीं। राज्य स्तर पर लॉजिस्टिक जरूरतों के अनुरूप फोर्टिफाइड या नॉन-फोर्टिफाइड चावल की व्यवस्था की स्वीकृति मिली है।
यह कदम पोषण अभियान को वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा, जिससे गरीबों तक वास्तविक लाभ सुनिश्चित होगा। भविष्य में उन्नत तकनीक से यह प्रक्रिया और सशक्त बनेगी।