भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने तमिलनाडु के सलेम स्थित आईआईएचटी के नए एकेडमिक ब्लॉक का उद्घाटन कर हैंडलूम क्षेत्र को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि यह संस्थान सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है।
कार्यक्रम में सलेम के गौरवशाली इतिहास को याद किया गया, जो सी राजगोपालाचारी से जुड़ा है। राजाजी का कानूनी सफर यहीं शुरू हुआ और वे सलेम म्युनिसिपैलिटी के प्रमुख भी बने। राष्ट्रपति भवन में उनके बस्ट का हालिया उद्घाटन इस विरासत को सलाम करता है।
संस्थान उत्पादकता, गुणवत्ता बढ़ाने और बाजार-अनुकूल उत्पादन पर केंद्रित है, बिना हैंडलूम की आत्मा खोए। भारत की समृद्धि के उदाहरण दिए- बनारसी ब्रोकेड, जामदानी, मूगा सिल्क, कानी शॉल, वेंकटगिरी, मंगलगिरी, माहेश्वरी व चंदेरी साड़ियां।
तमिलनाडु फोकस: चेट्टिनाडु कंडांगी साड़ियां, कांचीपुरम-अरानी-थिरुबुवनम सिल्क, चेन्नीमलाई कंबल, नागरकोइल वेश्ती-तौलिए, मदुरै सुंगुडी। ये कला सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक शक्ति के प्रतीक हैं।
इंडिया-ईयू एफटीए से टेक्सटाइल निर्यात को बल मिलेगा, विशेषकर सलेम हैंडलूम और अंबुर लेदर का। पीएम मोदी की नीतियां इसमें मील का पत्थर साबित हो रही हैं। आईआईएचटी को सृजनात्मक क्षेत्र में बदलाव लाने, कारीगर सम्मान बढ़ाने और रोजगार सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा।
परिसर में देशव्यापी हैंडलूम प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, तमिलनाडु मंत्री आर राजेंद्रन समेत गणमान्यजन मौजूद थे। यह प्रयास परंपरा को मजबूत कर कारीगर परिवारों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगा।