दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को जेएनयू प्रदर्शन मामले में सभी 14 आरोपी छात्रों को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने पाया कि ये छात्र पेशेवर गुंडे या बार-बार अपराध करने वाले नहीं हैं, इसलिए उन्हें 25 हजार के मुचलके पर रिहा किया गया।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने जमानत का कड़ा मुकाबला किया। उन्होंने न्यायिक हिरासत की मांग करते हुए कहा कि जांच आगे बढ़ाने हेतु जरूरी है और हिंसा दोहराने का खतरा है। पुलिस ने जोर देकर कहा कि जेएनयू का यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था—यहां छात्रों ने पुलिस पर हमला बोला, झड़पें हुईं और अधिकारी जख्मी पड़े।
पुलिस ने कोर्ट के समक्ष चार पुरानी एफआईआर का हवाला दिया जहां ये छात्र प्रदर्शनों में हिंसा का सहारा ले चुके। कोर्ट में एक लड़की ने रो-रोकर सुनाया कि बिना वर्दी के 4-5 लोग उसे जबरन खींच ले गए, हाथों पर चोटें आईं और खून जम गया।
छात्र पक्ष के वकीलों ने सफाई दी कि सभी जांच में सहायता करेंगे, लिखित गारंटी भी देंगे। अदालत ने स्वीकारा कि पुलिस पर प्रहार गंभीर है, विरोध के बहाने जायज नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन धाराओं में सजा पांच साल तक सीमित होने से जमानत दे दी।
यह निर्णय विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक शांति के द्वंद्व को उजागर करता है।