कोरोना काल के बाद नेपाल पर्यटन सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। पर्यटकों की संख्या 2019 से कम बनी हुई है, तीन सालों से सालाना मात्र दस लाख से ऊपर। पांच मार्च के चुनावी मैदान में दल इसकी कमान संभालने को तैयार हैं, घोषणापत्रों में बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में प्लेन दुर्घटनाएं, खराब हाईवे और प्रचार की कमी को जिम्मेदार ठहराया गया। सभी प्रमुख दल विमान सुरक्षा मजबूत करने, भारत के साथ हवाई समझौते, पांच वर्षों में दोगुनी संख्या व खर्च, ईयू ब्लैकलिस्ट से बाहर होना और नए हवाई अड्डों का विस्तार सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध हैं।
ओली की यूएमएल अवसंरचना विकास, बाजार प्रचार, आंतरिक सुरक्षा और नए पर्यटन स्थलों पर केंद्रित है। दहल की कम्युनिस्ट पार्टी एयरलाइंस तकनीकी सुधार व कानूनी लड़ाई का ऐलान कर रही है। कांग्रेस वेलनेस-स्पिरिचुअल टूरिज्म को प्राथमिकता देगी। आरएसपी ने भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं।
2025 में 11 लाख 58 हजार पर्यटक हवाई मार्ग से आए, पिछले साल से बेहतर। भारतीयों की संख्या 2.92 लाख रही, लेकिन 2026 की शुरुआत में 30% बढ़ोतरी। भारत शीर्ष स्रोत है 35%, फिर अमेरिका, चीन आदि। राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद सुधार के संकेत हैं। चुनावी वादे साकार हों तो पर्यटन फिर चमकेगा।