सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका को बदनाम करने वाले उल्लेखों पर तत्काल रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने इसे गहरी चालाकी भरी साजिश करार देते हुए सभी प्रतियों को बाजार से हटाने का निर्देश जारी किया।
मामला तब गरमाया जब सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ के समक्ष आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि बच्चों को न्यायिक भ्रष्टाचार सिखाना संस्था की प्रतिष्ठा पर सीधा प्रहार है। इससे अभिभावकों और युवाओं का विश्वास डगमगा सकता है।
एनसीईआरटी की ओर से तुषार मेहता ने क्षमा याचना की। उन्होंने जानकारी दी कि अध्याय के लेखकों पर सजा हुई है और वे सरकारी संस्थाओं से दूर रहेंगे। 32 बिकी प्रतियां भी वापस आ चुकी हैं, पूरी किताब की जांच होगी।
हालांकि, कोर्ट ने इसे नाकाफी ठहराया। सीजेआई ने चेतावनी दी कि यह न्यायपालिका के खून से खेलने जैसा है। संवैधानिक संस्थाओं के बीच स्वायत्तता और संतुलन को चुनौती देने वाली कोई सामग्री स्वीकार्य नहीं।
कोर्ट ने जिम्मेदारों की तलाश के लिए जांच शुरू करने को कहा। एनसीईआरटी ने संशोधित संस्करण जारी करने का भरोसा दिलाया। 11 मार्च को मामले की अगली सुनवाई निर्धारित है। यह घटना शिक्षा पाठ्यक्रमों में विवादास्पद सामग्री पर नियंत्रण की आवश्यकता को रेखांकित करती है।