उमस भरी गर्मी में छाछ का नाम सुनते ही मन प्रसन्न हो जाता है। यह मात्र पेय नहीं, आयुर्वेद की नजर में वात-पित्त-कफ को नियंत्रित करने वाली रामबाण औषधि है। लेकिन सही अनुपात में सेवन ही इसके पूरे लाभ देता है।
प्राचीन चिकित्सा पद्धति में छाछ को सर्वगुण संपन्न कहा गया है। दोष के अनुसार इसके मिश्रण से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर स्वस्थ रहता है।
वात वाले लोग अक्सर पेट की गड़बड़ी से परेशान रहते हैं। उनके लिए काला या सेंधा नमक मिली छाछ रामबाण है। यह दस्त रोकती है और अग्नि को तेज रखती है।
पित्त प्रकृति में गर्मी और एसिडिटी आम समस्या है। मिश्री के साथ छाछ पीने से ठंडक मिलती है, जलन मिटती है और पाचन क्रिया सामान्य हो जाती है।
कफ प्रभावित व्यक्तियों को सोंठ का उपयोग करना चाहिए। इससे खांसी-जुकाम नहीं होता और श्वसन तंत्र स्वच्छ रहता है। पाचन मंद नहीं पड़ता।
शरीर की प्रकृति को समझकर आहार-विहार अपनाएं। आयुर्वेद का यही मूल मंत्र है। इस गर्मी में छाछ को सही तरीके से अपनाकर आप स्वस्थ और ऊर्जावान बनें।