परमाणु मुद्दे पर ईरान-अमेरिका संबंधों में नई उम्मीद जगी है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को जेनेवा का रुख किया, जहां तीसरे चरण की अप्रत्यक्ष वार्ता होगी। पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सेना की तैनाती से उपजे तनाव के बीच यह कदम अहम है।
मंगलवार को एक्स पर अराघची ने घोषणा की कि गुरुवार से अमेरिका के साथ चर्चा पुनः आरंभ होगी। समानता और न्याय पर आधारित समझौते के प्रति प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अभूतपूर्व अवसर मिला है—चिंताओं का समाधान कर हित सुरक्षित करने का। कूटनीति प्रमुख हो तो सफलता निश्चित।
संसद स्पीकर गलीबाफ ने चेतावनी दी कि अमेरिका को गरिमा वाली डिप्लोमेसी या रक्षात्मक कदमों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने वार्ता का समर्थन किया लेकिन ईरान को न्यूक्लियर क्षमता न देने का वादा दोहराया।
राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री रावांची ने एनपीआर से कहा, समझौते हेतु हर संभव प्रयास करेंगे। जेनेवा में सद्भाव से जाएंगे, अमेरिका से पारस्परिक सहयोग की अपेक्षा। इच्छाशक्ति बनी रही तो शीघ्र परिणाम संभव।
जेनेवा की ये बैठकें मध्य पूर्व की शांति के लिए टर्निंग पॉइंट हो सकती हैं। ईरान की सक्रियता से सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन परिणाम दोनों पक्षों के लचीलेपन पर निर्भर।