गुवाहाटी में नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के डीजी राकेश गुप्ता ने मिशन एड्स सुरक्षा के अंतर्गत 1 दिसंबर 2027 तक एचआईवी पर काबू पाने का भारत का लक्ष्य दोहराया। उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए नेशनल एड्स एवं एसटीआई कंट्रोल प्रोग्राम की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के पहले चरण में यह ऐलान हुआ।
देश भर के 219 उच्च जोखिम वाले जिलों में से 60 उत्तर-पूर्व में हैं (सिक्किम 제외), जो इसे राष्ट्रीय एचआईवी रणनीति में फोकस क्षेत्र बनाए रखता है। गुवाहाटी की यह कार्यशाला क्षेत्रीय स्तर पर प्रगति तेज करने वाली गहन समीक्षा अभियान की शुरुआत है।
मंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव गुप्ता ने जिला-स्तरीय योजना एवं अमल को सशक्त बनाने पर बल दिया ताकि राष्ट्रीय लक्ष्य समय पर हासिल हो सकें। मेघालय के प्रतिनिधि पूर्व जैनतिया हिल्स, पूर्व खासी हिल्स, री भोई तथा पश्चिम जैनतिया हिल्स जिलों में गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विमर्श कर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर फरवरी-मार्च 2026 में 11 ‘सुरक्षा संकल्प कार्यशालाएं’ होंगी, सभी हाई-प्रायोरिटी जिलों को कवर करते हुए। गुवाहाटी पहली कड़ी है, जिसमें सात राज्यों – अरुणाचल, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा – के 60 जिलों के अधिकारी मौजूद हैं।
जिला अधिकारी 95-95-99 वैश्विक मानकों के अनुरूप रणनीतियां तैयार कर रहे हैं: 95% प्रभावितों को जागरूकता, 95% निदानितों को एआरटी तथा 99% उपचारितों में वायरल लोड नियंत्रण।
एनएसीपी की समीक्षा में जिला नेतृत्व, सूक्ष्म स्तर के सूचकांक, क्रियान्वयन दोषों का पता लगाना तथा स्थानीय ट्रेंड्स पर आधारित सुधार पर जोर है। वरिष्ठ अधिकारी तीन चरणों वाली बैठक में राज्य-केंद्रित बातचीत कर रहे हैं।
परिणामस्वरूप राज्यवार स्पष्ट मार्गदर्शिका बनेगी, जो मिशन एड्स सुरक्षा के जरिए एचआईवी/एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में परास्त करने के सरकारी वचन को साकार करेगी।