पोखरण के रेतीले धोरों पर 25 फरवरी को ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास ने भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। दक्षिणी कमान के नेतृत्व में टी-90 भंवर टैंक, के-9 वज्र, शरंग व बोफोर्स तोपें, रॉकेट सिस्टम, पैदल सेना युद्ध वाहन, ध्रुव हेलीकॉप्टर, अपाचे हमलावर हेलीकॉप्टर तथा निगरानी-प्रहारक ड्रोन ने संयुक्त कार्रवाई से लक्ष्यों का सफाया कर दिया।
यह यथार्थवादी युद्ध सिमुलेशन था, जिसमें लंबी दूरी के सटीक हमले, तीव्र गति से तैनाती, बहुस्तरीय संचालन और ड्रोन तकनीक का प्रभावी प्रयोग प्रमुख रहा। मरुभूमि की उग्र परिस्थितियों में भी टुकड़ियों ने बेजोड़ समन्वय दिखाया, जो उनकी हरमौसम तैयारियों को प्रमाणित करता है।
25 देशों से आए रक्षा पर्यवेक्षकों ने सेना के वेग, निशानेबाजी और तकनीकी एकीकरण पर मुहर लगाई। यह अभ्यास सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियारों और संयुक्त युद्ध कौशल विकास की दिशा में मील का पत्थर है। तपते रेत पर गूंजी यह अग्निपरीक्षा भारत की अटल रक्षा प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।