हरियाणा के गुरुग्राम में बहुचर्चित जमीन घोटाले के खुलासे में प्रवर्तन निदेशालय ने अंसल प्रॉपर्टीज पर शिकंजा कस दिया। आगरा में कंपनी से जुड़ी 598 करोड़ रुपये कीमत की अचल संपत्तियों को अस्थायी अटैचमेंट के जरिए जब्त कर लिया गया है। जांच में सरकारी तंत्र व रियल्टी माफिया की गहरी साजिश उजागर हुई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई द्वारा 2019 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ईडी सक्रिय हुई। इसमें एपीआईएल व सहयोगियों पर साजिश, जालसाजी व भ्रष्टाचार के आरोप हैं। गुरुग्राम सेक्टर 58-67 की मूल्यवान जमीन, जो विकास व लैंड बैंक के लिए अधिसूचित थी, धोखाधड़ी से निजी हाथों में चली गई।
एपीआईएल ने अधिसूचना से ठीक पहले जीपीए हासिल कर लिए, बिना भुगतान या अनुबंध शर्तों के। नोटिफिकेशन की अनिश्चितता से मालिक कमजोर पड़े और सस्ते में बेचने को मजबूर हुए। डीटीसीपी ने बादशाहपुर की 142 एकड़ पर लाइसेंस दिए, अधिसूचित हिस्से मुक्त कर एसेंसिया व वर्सालिया जैसे प्रोजेक्ट खड़े किए।
ये प्रोजेक्ट अब पूर्ण हो चुके, लेकिन खरीदारों को कानूनी पेचीदगियों का खतरा। ईडी ने आगरा संपत्तियों को लक्षित किया, जो एपीआईएल के नियंत्रण वाली शेल कंपनियों के नाम थीं। फंडिंग व लाभ का केंद्र वही रहा।
यह कार्रवाई न केवल अवैध कमाई वापस लाने का प्रयास है, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम। भविष्य में ऐसी साठगांठ रोकने हेतु सख्ती जरूरी।