राजसमंद में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना-प्रदर्शन जोर पकड़ लिया। मजदूर संघ के बैनर तले कलेक्ट्रेट पर सभा हुई, जहां नारेबाजी के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। वर्षों से चली आ रही शोषण की कहानी अब आर-पार की लड़ाई का रूप ले चुकी है।
ये बहुआयामी जिम्मेदारियां निभाती महिलाएं कई विभागों के काम संभालती हैं, लेकिन बदले में मिलता है नाममात्र का मानदेय। 4500 रुपये मासिक, बिना संसाधनों के और सेवानिवृत्ति पर कालीन अंधेरा। सरकार की उदासीनता से तंग आकर अब केंद्र बंद करने की धमकी दी गई है।
‘स्थायीकरण हो, समयबद्ध ड्यूटी हो और उचित वेतन हो,’ कविता बैरागी ने जोर देकर कहा। ‘परिवार पालना असंभव है इतने कम में।’ मंजू कंवर बोलीं, ‘बजट में हम सबसे उपेक्षित। 18 हजार न्यूनतम मानदेय या वेतनकर्मी का दर्जा दें। पेंशन सुनिश्चित करें।’
यह प्रदर्शन पूरे राज्य में आंगनबाड़ी व्यवस्था की पोल खोलता है। बच्चों के भविष्य से जुड़े इन केंद्रों का ठप होना लाखों परिवारों पर भारी पड़ेगा। कार्यकर्ताओं का संकल्प अटल है – मांगें मानो या आंदोलन झेलो। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा की उम्मीद है, लेकिन देरी घातक साबित हो सकती है।