हालिया विमान दुर्घटनाओं की श्रृंखला से चिंतित डीजीसीए ने मंगलवार को नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स के लिए कड़े सुरक्षा उपायों की घोषणा की। चतरा एयर एम्बुलेंस क्रैश में सात मौतें और अजीत पवार से जुड़े लियरजेट हादसा इन कदमों का कारण बने।
एनएसओपी प्रतिनिधियों के साथ बैठक में नई प्रकटीकरण व्यवस्था लागू की गई। वेबसाइटों पर विमान की उम्र, सर्विस इतिहास व पायलट का रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से दिखाना होगा, ताकि चार्टर ग्राहक जागरूक रहें।
सुरक्षा रैंकिंग सिस्टम शुरू होगा, डीजीसीए साइट पर मानकों के साथ। सीवीआर ऑडिटों की संख्या बढ़ेगी, साथ ही डेटा सत्यापन से अनधिकृत उड़ानों का पर्दाफाश होगा।
सुरक्षा चूक में नेतृत्व की जिम्मेदारी तय होगी, पायलटों पर बोझ नहीं डाला जाएगा। ड्यूटी समय सीमा तोड़ने या न्यूनतम मानकों से नीचे उतरने पर लाइसेंस पांच वर्ष के लिए रोक सकें। ऑपरेटरों पर भारी जुर्माना व परमिट निलंबन का प्रावधान।
बूढ़े विमान व ट्रांसफर प्रक्रिया में रहने वालों की कड़ी नजर। इनहाउस एमआरओ पर छापे, खामियों पर आउटसोर्सिंग जरूरी।
मौसम हादसे अक्सर फैसले की भूल से होते हैं। रीयल-टाइम मौसम तकनीक, एसओपी अनुपालन व ट्रेनिंग में वेदर रणनीति पर फोकस के आदेश।
एसओपी ऑडिट पहले फेज के बाद दूसरे फेज से सभी कवर होंगे, भारतीय चार्टर उड्डयन को सुरक्षित बनाते हुए।