एंटरटेनमेंट की दुनिया में संदीपा धर ने दो ऐसे प्रोजेक्ट्स चुने हैं जो उनके टैलेंट की मिसाल हैं। ‘चुंबक’ में हल्की-फुल्की कॉमेडी तो ‘दो दीवाने शहर में’ में भावुक ड्रामा। ये दोनों ने उनके करियर को नई दिशा दी है।
‘चुंबक’ पड़ोसियों के आपसी रिश्तों पर बनी फैमिली वाली कहानी है। संदीपा कहती हैं, ‘यह खो चुके अपनापन वापस लाता है। हर उम्र के लिए सेफ कंटेंट, बिना किसी भद्दे जोक के। लोग बेझिझक एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं।’
कॉमेडी करना उनके लिए नया अनुभव था। ‘सटीकता जरूरी है, गलत टाइमिंग पर मजा किरकिरा हो जाता है। सुमित व्यास, देवेन भोजानी जैसे दिग्गजों से बहुत सीखा। सेट फैमिली जैसा था, अब विदाई का दुख हो रहा है।’
‘दो दीवाने शहर में’ की नैना गहरे मनोविज्ञान वाली कैरेक्टर है। कम सीन होने पर भी प्रभावशाली। ‘अंदरूनी संघर्ष दिखाना मुश्किल था। इमोशनल सीन में असल भावनाएं लानी पड़ीं। गर्मी में शूटिंग चुनौतीपूर्ण रही, पर टीम का साथ यादगार बना दिया।’
संदीपा का यह दोहरा रोल उनके बहुमुखी प्रतिभा को प्रमाणित करता है। भविष्य में और भी शानदार परफॉर्मेंस की उम्मीद है।