तमिलनाडु में सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने पुलिस पर डीएमके सरकार के इशारों पर नाचने का आरोप लगाया है। पार्टी के 25,000 नुक्कड़ सभाओं के लिए अनुमति मांगने पर देरी और मनमानी से लोकतंत्र पर सवाल उठे हैं।
प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद ने साफ कहा कि पुलिस को पक्षपात छोड़कर कानूनन अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने आला अधिकारियों से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का आह्वान किया।
नैनार नागेंद्रन की अगुवाई और के. अन्नामलाई के सुझावों से लैस यह मुहिम 17 फरवरी को शुरू हुई। एल. मुरुगन, पोन राधाकृष्णन, वनाथी श्रीनिवासन जैसे दिग्गजों ने जिलों में सभाओं का उद्घाटन किया।
हर सभा कई बूथ क्षेत्रों पर केंद्रित है, एनडीए सहयोगियों के साथ। मुद्दे स्पष्ट हैं- डीएमके का कथित भ्रष्टाचार, परिवारवाद, ड्रग्स का बाजार, वादाखिलाफी और वित्तीय बोझ।
तीन दिनों में अनुमतियों पर अड़चनें, रद्दीकरण और दबाव की शिकायतें आईं। सीएम स्टालिन के कोलाथुर जैसे इलाकों में खुली बाधा।
मुख्य सचिव से लेकर डीजीपी, चेन्नई कमिश्नर तक सभी से न्याय की गुहार। मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जिला निगरानी की मांग।
भाजपा ने अमनप्रियता का वादा किया और एनडीए के पक्ष में हवा का दावा किया। तमिलनाडु में बदलाव की बयार बह रही है।