19 फरवरी को वाशिंगटन में बोर्ड ऑफ पीस की ऐतिहासिक पहली बैठक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की आशंका जताई। उन्होंने इशारों में कहा कि 10 दिनों के अंदर बड़ा फैसला आ सकता है।
ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर जून के हमलों को याद करते हुए ट्रंप बोले, ‘अब एक कदम और आगे बढ़ना पड़ सकता है—या डील का रास्ता अपनाएं।’ टाइमलाइन देते हुए कहा, ’10 दिनों में साफ हो जाएगा।’
उन्होंने जोर दिया, ‘ईरान को न्यूक्लियर हथियार नहीं मिलने चाहिए। इससे मिडिल ईस्ट की शांति खतरे में पड़ जाएगी।’
कूटनीति की तारीफ में ट्रंप ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के प्रयासों का जिक्र किया। ‘ईरान हॉटस्पॉट बना हुआ है, लेकिन वार्ता सकारात्मक है। पिछले वर्षों ने साबित किया कि ईरान से सौदा कठिन है, पर अच्छा एग्रीमेंट चाहिए।’
हमास मुद्दे से लेकर बोर्ड की अहमियत पर राय रखी। ट्रंप ने इसे सर्वाधिक महत्वपूर्ण पैनल करार दिया और अनुपस्थित देशों पर चुटकी ली। यूरोप के कई देश यूएन को चुनौती देने और ट्रंप की स्थायी कमान की आशंका से परहेज कर रहे हैं।
ट्रंप का यह बयान मिडिल ईस्ट की भविष्य की तस्वीर बदल सकता है, जहां शांति प्रयासों में नया मोड़ आ गया है।