बॉलीवुड के उन सितारों में शुमार हैं अन्नू कपूर, जिन्होंने संघर्ष से शोहरत हासिल की। 20 फरवरी 1956 को मध्य प्रदेश के भोपाल में पैदा हुए अनिल कपूर का घर थिएटर और साहित्य से भरा था। पिता का थिएटर ग्रुप, मां की उर्दू पढ़ाने की नौकरी, लेकिन पैसों की कमी ने जिंदगी मुश्किल कर दी। स्कूल की पढ़ाई अधर में लटक गई।
रंगमंच ने बुलाया, एनएसडी ने तराशा। मात्र 22 में 70 साल के बूढ़े का अभिनय किया, जो इतना जबरदस्त था कि श्याम बेनेगल ने ‘मंडी’ साइन कर लिया। फिल्मी पारी की शानदार शुरुआत हुई।
1984 का ‘उत्सव’ ने पहचान दी, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘तेजाब’, ‘राम लखन’ ने दीवानगी। सपोर्टिंग रोल्स में भी जान फूंक दी। ‘विक्की डोनर’ ने राष्ट्रीय सम्मान दिलाया। ‘अंताक्षरी’ जैसे शो और रेडियो ने लोकप्रियता बढ़ाई। 40 साल से ज्यादा का सफर, अभी भी जोश में।