राजस्थान की रंगीन दुनिया में बसी ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ सन नियो पर परंपरा-आधुनिकता के संघर्ष को उजागर कर रही है। अभिनेत्री श्रेया जैन का वैष्णवी रोल खासी लोकप्रिय है, जो बेमानी रस्म-rivाजों के विरुद्ध विद्रोह का प्रतीक है।
बातचीत में श्रेया ने खुलासा किया, ‘मेरा पात्र वैष्णवी रीति-रिवाजों का सम्मान तो करती है, लेकिन अंधविश्वास में नहीं पड़ती। सवाल पूछने वाली, समानता की मांग करने वाली यह लड़की महिलाओं की पुरानी जंजीरों को तोड़ती है।’
वैष्णवी रिश्तों में पारदर्शिता और संतुलन चाहती है। ‘शादी या मोहब्बत में एक तरफा फैसले नहीं चलते,’ उन्होंने जोर दिया।
जयपुर निवासी श्रेया के लिए शो खास है। ‘स्थानीय बोली, संस्कृति से जुड़ाव बचपन का है। किरदार सहज आता है।’
मुंबई सफर में परिवार का सहारा, शुरुआती मुश्किलें सामान्य। ‘उड़ारिया’ ने पहला बड़ा ब्रेक दिया, अब ‘बींदणी’ नई ऊंचाई।
कैमरे पर घबराहट कलाकार को सजग रखती है। स्वयं को परिश्रमी, भावुक, करुणामयी कहा।
तंदुरुस्ती के लिए संतुलित आहार, योग, पैदल चलना जरूरी। खाली वक्त में एस्ट्रोनॉमी पढ़ती हैं। अच्छे कलाकारों से सीखती रहती हैं।